संक्षेप में
Daniel Goleman दिखाते हैं कि बुद्धिमत्ता केवल तार्किक सोच, ज्ञान या IQ स्कोर पर समाप्त नहीं होती। उतना ही महत्वपूर्ण है कि व्यक्ति अपनी भावनाओं को कैसे पहचानता है, आवेगों को कैसे नियंत्रित करता है, प्रेरणा कैसे बनाए रखता है, दूसरों को कैसे समझता है और संबंध कैसे बनाता है। इस पुस्तक का सबसे बड़ा मूल्य यह है कि यह मनोविज्ञान, तंत्रिका-विज्ञान और रोज़मर्रा के उदाहरणों को एक स्पष्ट नक्शे में जोड़ती है: भावनाएँ सोचने में बाधा नहीं, बल्कि उस प्रणाली का हिस्सा हैं जो चुनाव, स्वास्थ्य, सीखने, काम और लोगों से निकटता को प्रभावित करती है। यह उन पाठकों के लिए उपयोगी है जो स्वयं और दूसरों को बेहतर समझना चाहते हैं, साथ ही माता-पिता, शिक्षकों, नेताओं और उन सभी के लिए भी, जो देखते हैं कि भावनात्मक परिपक्वता के बिना सफलता नाजुक हो सकती है। पुस्तक जीवन को “EQ, IQ से अधिक महत्वपूर्ण है” जैसे सरल नारे में नहीं बदलती; वह दिखाती है कि वास्तविक मानवीय क्षमता वहाँ जन्म लेती है जहाँ बुद्धि और भावनाएँ साथ काम करना सीखती हैं।